गुरुवार, 19 सितंबर 2024

विद्यालय निरीक्षण की निगरानी खुद से ACS करेंगे, निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति करने वाले कर्मी व अधिकारीयों पर होंगी कड़ी करवाई, सेवा तक हो सकती है समाप्त!

विद्यालय निरीक्षण की निगरानी खुद से ACS करेंगे, निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति करने वाले कर्मी व अधिकारीयों पर होंगी कड़ी करवाई, सेवा तक हो सकती है समाप्त!

शिक्षा विभाग ने स्कूलों के निरीक्षण को और प्रभावी बनाने तथा इसके बेहतर परिणाम हासिल करने को लेकर कई अहम फैसले लिये हैं।

इसी क्रम में विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) डॉ. एस सिद्धार्थ ने निर्देश दिया है कि मुख्यालय के सभी अधिकारियों की स्कूल निरीक्षण की रिपोर्ट निदेशक के माध्यम से उनके पास आएगी, ताकि उस पर तत्काल आवश्यकतानुसार निर्णय ले सकें।

इस संबंध में शिक्षा वभाग द्वारा जिला और विभागस्तर पर अलग-अलग निरीक्षण कराया जाता है. मुख्यालय से भेजे जाने वाले पदाधिकारियों को जिला आवंटन विभाग स्वयं करता है।. पदाधिकारी करीब तीन महीने तक एक ही जिले के स्कूलों का निरीक्षण करते हैं, ताकि इस दौरान वह कमियों को दूर करा सकें।

जिलास्तर पर स्कूलों के निरीक्षण कार्य देने की जिम्मेदारी उप विकास आयुक्तों को दी गयी है. शिक्षा विभाग ने साफ कहा है कि स्कूलों के निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति नहीं चलेगी. स्कूल में सुधार अनिवार्य रूप से होना और दिखना चाहिए तभी, सरकारी स्कूलों के प्रति बच्चों और अभिभावकों में विश्वास जगेगा. इससे स्कूलों में बच्चों की संख्या में इजाफा होगा और शिक्षा की गणुवत्ता में भी सुधार होगा।

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को सौंपे जाने वाली रिपोर्ट से अलग होगी विभाग ने यह भी कहा है कि स्कूल में सुधार नहीं पाये जाने पर निरीक्षण करने वाले संबंधित पदाधिकारियों पर कार्रवाई होगी।. विभाग के पदाधिकारी निरीक्षण रिपोर्ट कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में जमा करते रहे हैं. मगर अब वह एक अलग से भी रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसमें स्कूल की कमियों के साथ-साथ उसमें सुधार के उपाय भी बताएंगे. यह रिपोर्ट माध्यमिक शिक्षा निदेशक के माध्यम से अपर मुख्य सचिव के पास जाएगी। रिपोर्ट और सुझाव पर तत्काल कार्रवाई होगी।

स्कूल संचालन में आ रही कठिनाइयों को देखेंगे।

विभाग ने पदाधिकारियों को कहा गया है कि स्कूल में निरीक्षण के दौरान वह पर्याप्त समय वहां पर देंगे. स्कूल की हर गतिविधि, पठन-पाठन और उपलब्ध सुविधाओं का संपूर्णता में निरीक्षण करेंगे।. साथ ही निरीक्षण के दौरान प्रधानाध्यापक तथा शिक्षकों के साथ बातचीत करेंगे और जानेंगे कि स्कूल के संचालन में किस तरह की कठिनाइयां सामने आ रही हैं।

मंगलवार, 17 सितंबर 2024

स्कूलों की टाइमिंग, शिक्षकों की वेतन, स्थानांतरण लेकर बिहार विधान परिषद ने 8 सदस्य शिक्षा समिति का किया गठन, समिति को रिपोर्ट तैयार कर सौंपने की जिम्मेदारी सभापति ने सौंपी

स्कूलों की टाइमिंग, शिक्षकों की वेतन, स्थानांतरण लेकर बिहार विधान परिषद ने 8 सदस्य शिक्षा समिति का किया गठन, समिति को रिपोर्ट तैयार कर सौंपने की जिम्मेदारी सभापति ने सौंपी।

बिहार के नियोजित शिक्षक हों या स्थाई, सभी शिक्षकों का मुद्दा विधान परिषद में जोर-शोर से उठाया जाता है. शिक्षक-स्नातक कोटे के चुनकर विधान परिषद पहुंचने वाले सदस्य शिक्षकों के मुद्दे पर सरकार को घेरते हैं।

विधान परिषद में शिक्षा समिति के गठन से शिक्षकों को काफी फायदा होगा अब शिक्षकों की समस्या का समाधान शत प्रतिशत किया जाएगा शिक्षा समिति के गठन करने का उद्देश्य है शिक्षकों की और शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं का समाधान करना।

 राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के समय में बदलाव किया जाएगा विधान परिषद में शिक्षा समिति को अपनी रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया है। शिक्षा समिति में कुल 8 सदस्य हैं इन्हें यह आदेश दिया गया है कि आप विद्यालय के संचालन अवधि पर रिपोर्ट तैयार करके साथ ही साथ शिक्षकों की की भी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर विधान परिषद में प्रस्तुत करें ताकि सरकार शिक्षकों की समस्या का समाधान जल्द से जल्द कर सके। चाहे यह समस्या वेतन की हो या शिक्षकों के स्थानांतरण की हो उन पर कार्रवाई की हो।

शिक्षा-शिक्षकों के मुद्दे पर तो सत्ता पक्ष के सदस्य भी सरकार को घेरने से बाज नहीं आते। सदस्य शिक्षकों की बुनियादी समस्याओं पर सदन के अंदर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हैं. इसी कड़ी में विधान परिषद सभापति ने शिक्षा समिति का गठन किय़ा है। यह समिति शिक्षा संबंधी बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार कर सभापति के समक्ष रखेगी, ताकि आगे की कार्रवाई हो सके।

बिहार विधान परिषद में शिक्षा समिति का गठन किया गया है. इसमें अध्यक्ष समेत कुल 8 सदस्य होंगे. इस संबंध में विधान परिषद सचिवालय की तरफ से आज 17 सितंबर को अधिसूचना जारी कर दी गई है। सभापति की अनुशंसा के बाद यह समिति गठित की गई है।  जिसमें उपसभापति प्रोफेसर रामवचन राय को अध्यक्ष बनाया गया है। जबकि डॉ संजीव कुमार सिंह संयोजक होंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व विधान पार्षद डॉ मदन मोहन झा सदस्य, नवल किशोर यादव सदस्य, प्रोफेसर वीरेंद्र नारायण यादव सदस्य, सर्वेश कुमार सदस्य, निवेदिता सिंह सदस्य और कुमार नागेंद्र को सदस्य बनाया गया है।  नवगठित शिक्षा समिति अपनी आंतरिक बैठक में शिक्षा से संबंधित विषय पर रिपोर्ट तैयार करेगी। साथ ही सभापति के आदेश पर आगे की कार्रवाई करेगी।

🖊️रिपोर्ट ;- संजीव समीर, ब्यूरो चीफ, शिक्षातक न्यूज़

शनिवार, 14 सितंबर 2024

सिवानः सरकारी आदेशों की अनदेखी, BEO श्रवण कुमार निलंबित।

सिवानः सरकारी आदेशों की अनदेखी, BEO श्रवण कुमार निलंबित ।
ACS एस0 सिद्धार्थ की जांच में अनियमितता का है मामला।
http://shikshatak-news.blogspot.com/2024/09/beo.html

सिवान। जिला शिक्षा पदाधिकारी, सिवान द्वारा 12 सितंबर 2024 को किए गए स्कूल निरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। निरीक्षण के दौरान अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने उत्क्रमित मध्य विद्यालय, माघर, सहायता प्राप्त मध्य विद्यालय, माघर, और उच्च विद्यालय, माघर का दौरा किया।


उत्क्रमित मध्य विद्यालय, माघर में 10 शिक्षक उपस्थित थे जबकि 4 शिक्षक बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए। हैरान कर देने वाली बात यह रही कि कक्षाएं खाली थीं और छात्र पेड़ के नीचे बैठे पाए गए। यहां तक कि कक्षाओं में ब्लैकबोर्ड ठीक से काला नहीं किया गया था और न ही चौक-डस्टर की व्यवस्था थी।

सहायता प्राप्त मध्य विद्यालय, माघर में प्रधानमंत्री पोषण योजना का सही संचालन नहीं हो रहा था। उच्च विद्यालय, माघर में मध्यांतर के बाद बच्चों की उपस्थिति बेहद कम थी जबकि उपस्थिति पंजी में ज्यादा बच्चों की उपस्थिति दर्ज की गई थी। इसके अलावा साफ सफाइ की भी भारी कमी पाई गई।

इन लापरवाहियों के चलते, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO), भगवानपुर हॉट, सिवान, श्री श्रवण कुमार पर कार्रवाई की गई है। उन्हें स्कूलों की सही ढंग से निगरानी और अनुश्रवण नहीं करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत की गई है।

निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा
पदाधिकारी, गोपालगंज निर्धारित किया गया है और उन्हें जीवन निर्वाहन भत्ता वहीं से दिया जाएगा। श्री कुमार के खिलाफ आगे की जांच के लिए प्रपत्र क जल्द गठन किया जाएगा।

बुधवार, 11 सितंबर 2024

शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सामने आई बड़ी खबर।

PATNA - शिक्षा विभाग के सचिव वैद्यनाथ यादव की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। जल्द ही सरकार इसपर बड़ा निर्णय लेने जा रही है।

ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बिंदु
▪️ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर जिले के DM,DDC एवं DEO को मिलेगा बड़ा जिम्मा।
▪️सक्षमता पास शिक्षकों की होगी पोस्टिंग।
▪️ जिले से ही होगी अब शिक्षकों की पोस्टिंग।
▪️BPSC पास शिक्षकों का होगा तबादला।
▪️आवेदन के लिए मिलेगा 15 दिन का समय।
▪️पोस्टिंग और तबादला सब होगा एक साथ।
▪️ अक्टूबर से ट्रांसफर-पोस्टिंग होगी शुरू।

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छात्रों का नोटबुक तय करेगा शिक्षकों का भविष्य, अधूरा रहा तो जाएगी नौकरी! ACS एस सिद्धार्थ ने गुरूजी के काम के आकलन का निकाला खास तरीका, अब खैर नहीं

पटना. शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पद पर आते ही एस सिद्धार्थ ने राज्य के स्कूलों में पठन पाठन को दुरुस्त करने के लिए खास फॉर्मूला अपना लिया है. सिद्धार्थ ने इसके लिए छात्रो के नोटबुक को सबसे बड़े हथियार के रूप में अपनाने की तैयारी की है. यानी शिक्षक क्या पढ़ाते हैं इसका पूरा लेखा-जोखा छात्रों के नोटबुक से निकलेगा. सूत्रों का कहना है कि एस सिद्धार्थ ने बिहार के तमाम सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के पढ़ाने पर निगरानी का नायाब तरीका अपनाने का प्लान तय किया है. 
शिक्षक स्कूलों में रोजाना क्या पढ़ाते हैं. कितना टास्क देते हैं. बच्चे किन पाठों को पढ़े हैं. पढाई के कुल कितने घंटे हुए हैं इन तमाम चीजों का खुलासा बस छात्रों की कॉपी देखते ही कर लेंगे. सूत्रों के अनुसार एस सिद्धार्थ ने छात्रों की कॉपी चेक करने पर खास ध्यान देने कहा है. इसके अनुसार स्कूलों में जब निरिक्षण के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी जाएंगे तो वे सामान्य हाजिरी आदि चेक करने के अतिरिक्त एक और खास काम करेंगे. इसमें छात्रों की कॉपी चेक करना होगा. यानी किसी शिक्षक ने पिछले दिनों क्या पढ़ाया है इसका पूरा लेखा-जोखा छात्रों के कॉपी से पता चलेगा. 

माना जा रहा है कि इससे शिक्षको के कामकाज पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी. वे क्या पढ़ाते हैं और कितना पढ़ाते हैं उसका आकलन छत्रों की कॉपी देखकर कर सकेंगे. सिद्धार्थ के इस नायाब तरीके से स्कूलों में शिक्षकों द्वारा टाइम पास करने की शिकायतें भी दूर हो सकती हैं. साथ ही जो शिक्षक तय मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाएंगे उन पर विधि सम्मत कार्रवाई भी की जा सकती है. 


गौरतलब है कि शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव का पद संभालते ही एस. सिद्धार्थ लगातार अपने एक्शन से सबको आकर्षित किए हुए हैं. उन्होंने पिछले दिनों भोजपुर के बिहिया में एक स्कुल में छापेमारी करने के दौरान बच्चों को सड़क पर घूमते पकड़ा था. इसके पहले वे लोकल ट्रेन में सवार होकर पटना से बिहिया गए थे. वहीं शनिवार को स्कूल टाइमिंग के बाद एक रिक्शा पर सवार कुछ बच्चों को सिद्धार्थ ने देखा तो उन्हें भी रोककर सवाल किया. उनके इस एक्शन से हड़कंप भी मचा और एक सकारत्मक संदेश भी गया.

नियोजितों को मिलने वाले लाभ से विशिष्ट शिक्षक क्यों हो गए हैं बेचैन? क्यों मची है खलबली?

आखिर नियोजितों को मिलने वाले लाभ से विशिष्ट शिक्षक क्यों हो गए हैं बेचैन? क्यों मची है खलबली? भूलकर भी ये गलती नहीं करें!? देखिये पूरी जानका...