गुरुवार, 28 मार्च 2024

पाठक के ज़िला शिक्षा पदाधिकारी करने गए निरीक्षण || DEO और हेडमास्टर के बीच हुई जमकर मारपीट || DEO साहेब का फूटा सर || हेडमास्टर को आई गम्भीर चोटें

मुजफ्फरपुर:  कुढ़नी प्रखंड अंतर्गत अख्तियारपुर परेया पंचायत के करमचंद रामपुर बलड़ा माध्यमिक विद्यालय में सोमवार की दोपहर करीब साढ़े तीन बजे निरीक्षण के दौरान डीईओ अजय सिंह और प्राचार्य राकेश कुमार के बीच झड़प हो गयी.

दौरान स्कूली बच्चों और शिक्षकों के बीच काफी देर तक अफरा-तफरी मची रही.

पुलिस ने की मामले की जांच

मारपीट की सूचना पाकर कुढ़नी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल पर मामले की जांच की. लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही मारपीट में घायल हुए प्राचार्य बेहतर इलाज के लिए वहां से चले गये थे. वहीं डीईओ भी बेहतर इलाज के लिए रवाना हो गये. मामले में पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई की जा रही है.

क्या बोले प्राचार्य

घायल प्रधानाध्यापक राकेश कुमार ने फोन पर बताया कि डीईओ साहब साढ़े तीन बजे तीन सहयोगी के

साथ पहुंचे और कक्षा में पढ़ रहे सभी छात्रों का निरीक्षण किया. इसके बाद वह प्राचार्य कक्ष में आकर बैठ गये और मुझ पर स्कूल में बच्चे की उपस्थिति, तोड़फोड़ समेत अन्य आरोप लगाने लगे. जब मैंने उसे स्कूल के विकास पर होने वाले खर्च के बारे में बताया तो वह भड़क गए और मेज पर रखे स्टांप पैड से मेरी नाक और चेहरे पर वार कर दिया.

मैं मदद के लिए चिल्लाया. इसी बीच उनके साथ अन्य लोग भी आ गये. उन तीनों ने मुझ पर भी हमला कर दिया, वही डीईओ जो मेरे साथ मारपीट कर रहे थे, उन्होंने गुस्से में आकर अपना संतुलन खो दिया और टेबल टॉप के शीशे से टकरा गये, जिससे वे आंशिक रूप से घायल हो गये. साथ ही उन सभी ने मुझे लोहे के माइक से पीटा, जिससे मुझे काफी गंभीर चोटें आयीं हैं.

सोमवार, 4 मार्च 2024

Breaking_News : ज़िला शिक्षा पदाधिकारी और प्रधानाध्यापक में हुई हाथापाई | DEO Muz. घायल | HM पर हुआ FIR....

#Breaking_News
ज़िला शिक्षा पदाधिकारी और प्रधानाध्यापक में हुई हाथा*पाई | DEO Muz. घायल | HM पर FIR..... 

मुजफ्फरपुर : कुढ़नी प्रखंड में जांच करने पहुंचे मुजफ्फरपुर के DEO और प्रधानाचार्य से हुई हाथापाही

सूचना मिलते ही कुढ़नी थाना प्रभारी रवि प्रकाश पहुंच कर मामले को शांत कराया। वही जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रधानाचार्य के खिलाफ कुढनी थाना मे लिखित आवेदन दिए हैं।
ज्ञात हो कि ACS के के पाठक के आदेश की तामिला हेतु ज़िला शिक्षा पदाधिकारी जांच करने पहुँचे थे। के के पाठक के अनुसार विद्यालय सुबह 9 से शाम 5 बजे तक चलाना है जबकि बिहार के मुख्यमंत्री ने सदन में आदेश दिया कि स्कूल सुबह10 से शाम 4 बजे तक ही चलाना है ऐसे में पदाधिकारी से बात बढ़ी तो मारपीट तक नौबत आ गई।
आगे जांच में क्या आता है देखना दिलचस्प होगा।

मंगलवार, 10 अक्टूबर 2023

बिहार सरकार का शिक्षा विभाग 15 लाख बच्चों का नाम काटने का रखा लक्ष्य

बिहार सरकार का शिक्षा विभाग 15 लाख बच्चों का नाम काटने का रखा लक्ष्य।
आखिर शिक्षा विभाग ऐसा क्यों कर रही है। इसे समझने के लिए नीचे वीडियो का लिंक क्लिक करके देख सकते हैं।
●शिक्षा विभाग बिहार सरकार के नाम काटने के गणित को समझिये🤔 | 
●बिहार सरकार बच्चों की उपस्थिति प्रतिशत (%) बढ़ाने व श्रेय लेने का कर रही खेला❌।
●शिक्षकों को बनाया जा रहा है मोहरा।
●आम जनता को  करना होगा जागरूक
●बताना होगा सरकार और शिक्षा विभाग की क्या है मंशा?
👇वीडियो यहां देखें - 
https://youtu.be/QlIyyCfgQzk?si=l6ByCIHtFDKnATz2

समीक्षा के बाद अपडेशन नही करने के मामले मे कार्रवाई की बारी

पटना..... राज्य मे "ई-शिक्षाकोश" पोर्टल पर स्कूली शिक्षकों का प्रोफाइल अपडेट करने की मियाद पूरी हो चुकी है।

सोमवार, 9 अक्टूबर 2023

शिक्षा विभाग का कारनामा 5 लाख 40 हजार सरकारी स्कूलों के बच्चों के नाम काटे, शिक्षा विभाग का तर्क जान रह जाएंगे हैरान

शिक्षातक Live/News : अपर मुख्य सचिव के के पाठक के सरकारी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने को लेकर दिए गये आदेश के बाद से शिक्षा विभाग एक्शन में है। विभाग ने स्कूलों से गायब रहने वाले करीब साढ़े पांच लाख छात्रों का नामांकन रद्द कर दिया है। ये ऐसे छात्र थे जो स्कूल से लंबे समय से गायब चल रहे थे।
सरकारी विद्यालयों से 5 लाख 40 हजार बच्चों के नाम काटे गए।
सर्वाधिक चौथी कक्षा के 74 हजार 394 छात्र-छात्राओं का कटा नाम।

पटना। शिक्षा विभाग के एक्शन से ऐसा लग रहा है कि अपर मुख्य सचिव के के पाठक किसी को बख्शने के मूड में नहींं हैं। के के पाठक के आदेश के बाद प्रारंभिक से लेकर माध्यमिक विद्यालयों से अब तक पांच लाख 39 हजार 466 छात्र-छात्राओं के नामांकन रद्द किए जा चुके हैं।
ये विद्यार्थी पहली कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के हैं, जो सरकारी विद्यालयों में नामांकन के बावजूद बिना सूचना के लगातार गैरहाजिर थे।
शिक्षा विभाग का क्या है तर्क
शिक्षा विभाग का मानना है कि इनमें दोहरे नामांकन लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या अधिक होगी, जो पढ़ाई के लिए निजी विद्यालयों में नामांकित हैं, लेकिन सरकार की लाभुक योजनाओं का लाभ लेने के लिए अभिभावकों ने उनका सरकारी विद्यालयों में नाम लिखा रखा है। ऐसे विद्यार्थी सरकारी विद्यालयों से लगातार गैरहाजिर चल रहे थे।
क्या कहती है विभाग की मॉनीटरिंग रिपोर्ट?
शिक्षा विभाग की मॉनीटरिंग रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी विद्यालयों में गैरहाजिर चल रहे करीब पांच लाख 40 हजार विद्यार्थियों के नाम काटे जा चुके हैं।
उनमें पहली कक्षा के 31 हजार 567, दूसरी कक्षा के 49 हजार 214, तीसरी कक्षा के 67 हजार 294, चौथी कक्षा के 74 हजार 394, पांचवी कक्षा के 72 हजार 832, छठी कक्षा के 63 हजार 667, सातवीं कक्षा के 60 हजार 354, आठवीं कक्षा के 58 हजार 563, नौवीं कक्षा के 4 हजार 934, 11वीं कक्षा के 3 हजार 765 और 12वीं कक्षा के 2 हजार 198 विद्यार्थी हैं।

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आखिर नियोजितों को मिलने वाले लाभ से विशिष्ट शिक्षक क्यों हो गए हैं बेचैन? क्यों मची है खलबली? भूलकर भी ये गलती नहीं करें!? देखिये पूरी जानका...